अस्पताल संक्रमण सोसायटी के वार्षिक सम्मेलन में संक्रमण रोकथाम पर विचार विमर्श
अलीगढ़, 21 अगस्तः हास्पिटल इंफेक्शन सोसाइटी-इंडिया के 17वें वार्षिक सम्मेलन में विभिन्न विशेषज्ञों ने अस्पतालों में उपचार, प्रतिरोधात्मक क्षमता और नियंत्रण विषय पर चर्चा की। सम्मेलन का आयोजन संगठन की अलीगढ़ शाखा तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के माइक्रोबायोलाजी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। वार्षिक सम्मेलन से दो दिन पूर्व डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सीएमई और वर्कशाप का भी आयोजन किया गया।

एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने विशेष अतिथि के रूप में सम्मेलन का उद्घाटन किया और विशेष रूप से कोविड के दौरान संक्रमण की रोकथाम के महत्व पर जोर दिया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए हास्पिटल इंफेक्शन सोसाइटी, इंडिया के अध्यक्ष डा. टी एस जैन ने कहा कि चिकित्सा देखभाल प्रोटोकॉल के निरंतर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए अस्पतालों में केयर बंडलों का उपयोग आवश्यक था।
हास्पिटल इंफेक्शन सोसाइटी-इंडिया के सचिव डा. रमन सरदाना ने कहा कि विभिन्न प्रकार के संक्रमणों के लिए दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल तैयार करने में हास्पिटल इंफेक्शन सोसाइटी-इंडिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है और इस मोर्चे पर काफी काम किया गया है।
सम्मेलन में डा. ब्रह्म प्रकाश लेक्चर तथा डा. अजीता मेहता लेक्चर क्रमशः डा. शशांक एस. काले (न्यूरोसर्जरी विभाग, एम्स, नई दिल्ली) तथा डा. प्रिया इब्राहिम (निदेशक, नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलाजी, पुणे) द्वारा प्रस्तुत किया गया।
मेडिसिन फैकल्टी के अधिष्ठाता प्रोफेसर राकेश भार्गव ने कहा कि अस्पताल में होने वाले संक्रमण से रोगी में विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है तथा उसकी मानसिक स्थिति भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि नोसोकोमियल संक्रमण मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। इससे मरीज के इलाज की लागत भी बढ़ जाती है क्योंकि उसे अस्पताल में अधिक समय तक रहना पड़ता है।
जेएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. शाहिद अली सिद्दीकी ने कहा कि प्रोटोकाल तो मौजूद हैं, लेकिन कम संसाधनों वाले अस्पतालों के लिए उचित सिफारिशें की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जानकारी को प्रशासकों, संक्रमण नियंत्रण कर्मियों और रोगी की देखभाल करने वालों के लिए सहायक होना चाहिए। उन्होंने संक्रमण को रोकने के लिए अस्पताल संक्रमण सोसायटी, अलीगढ़ शाखा के प्रयासों की सराहना की।
प्रोफेसर हारिस एम. खान (आयोजन अध्यक्ष) ने कहा कि चिकित्सीय संक्रमणों पर यह सम्मेलन वर्तमान स्थिति में बहुत उपयोगी और सामयिक है जो शिक्षण में भी मदद करेगा।
प्रोफेसर तमकीन खान (सहायक आयोजन अध्यक्ष) ने कहा कि चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों के लिए आवश्यक है कि वह प्रोटोकाल का पालन करें। उन्होंने कहा कि हाथ धोने की प्रक्रिया, जो बहुत आसान है, का आमतौर पर पालन नहीं किया जाता है और कभी-कभी इसे गलत तरीके से किया जाता है। प्रोफेसर तमकीन ने कहा कि कोविड के समय में प्रोटोकाल पर ध्यान देने और दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता है।
प्रोफेसर एस. मुईद अहमद (संयोजक) ने कहा कि सात अलग-अलग विषयों पर प्री-सम्मेलन कार्यशालाएं, प्रख्यात विशेषज्ञों द्वारा मुख्य भाषण, शोध पत्रों की प्रस्तुति और विशेषज्ञों के साथ लाइव सत्र सम्मेलन का मुख्य आकर्षण थे।
आयोजन सचिव डाक्टर फातिमा खान ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जेएनएमसीएच के माइक्रोबायोलाजी विभाग के चिकित्सकों, रेजिडेंट डाक्टरों और सहयोगी स्टाफ के प्रयासों से सम्मेलन सफल हो पाया है।
तीन दिवसीय सम्मेलन में देश एवं विदेश के 109 विशेषज्ञों ने चिकित्सा विज्ञान में अपने अनुभवों से सहभागियों को लाभांवित किया। सम्मेलन में 17 प्रमुख सत्र, 59 आम सत्र और विशेषज्ञ से मिलें विषय से 34 सत्र आयोजित किये गये।
देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों और अस्पतालों के 50 शिक्षकों ने 7 कार्यशालाओं का आयोजन किया जिसमें 876 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मौखिक, चेयर्ड और ई-पोस्टर प्रस्तुति और प्रश्नोत्तरी के विजेताओं के लिए नकद पुरस्कारों की घोषणा की गई। अस्पताल इंफेक्शन सोसायटी-इंडिया सम्मेलन में पहली बार स्कूली बच्चों के लिए कविता प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।









