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Monday, January 30, 2023
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सी.डब्ल्यू.एस में जेंडर सेंसिटाइजेशन वर्कशॉप

अलीगढ़, 27 मईः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एडवांस्ड सेंटर फॉर वीमंेन स्टडीज (सीडब्ल्यूएस) में ‘लैंगिक संवेदीकरणः एक कदम समावेशिता की ओर‘ विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई जिसका उद्देश्य एक अधिक समावेशी और सुरक्षित समाज बनाने के लिए संवेदनशीलता पैदा करना है।

यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की जेंडर चैम्पियन योजना के अंतर्गत आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य छात्रों के बीच लैंगिक समानता को बढ़ाना और सकारात्मक सामाजिक मानदंड तैयार करना है जो लड़कियों और परिसर में उनके अधिकारों को महत्व देते हैं।

प्रोफेसर अजरा मूसावी (निदेशक, सीडब्ल्यूएस) ने कहा कि हर साल छात्रों में से जिम्मेदार किस्म के छात्रों को एक एकीकृत और अंतःविषयी दृष्टिकोण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए जेंडर चैम्पियन के रूप में चुना जाता है, जो महिलाओं और पुरुषों के अनुभव को आकार देने वाले लैंगिक सामाजिक-सांस्कृतिक ढांचे को समझते हैं। यूजीसी ने इस सम्बन्ध में दिशा-निर्देश जारी कर इसे लागू करने के लिए सभी शिक्षण संस्थानों के साथ साझा किया है।

उन्होंने कहा कि सी.डब्ल्यू.एस एएमयू में जेंडर चैम्पियन योजना को लागू करने की जिम्मेदारी पर काम करना जारी रखे हुए है, जिसे 2016-17 में केंद्र को सौंपा गया था। सी.डब्ल्यू.एस शिक्षक और अन्य संकायों के शिक्षक समन्वयक नियमित रूप से नियुक्त जेंडर चैम्पियन के संपर्क में रहते हैं ताकि छात्रों को लैंगिक मुद्दों को हल करने में मदद मिल सके।

प्रोफेसर अज़रा ने कहा कि हम अधिक समावेशी वातावरण के निर्माण के लिए इसी प्रकार की गतिविधिया आयोजित करने के लिए अन्य संकाय समन्वयकों और विभागों के साथ काम करने की भी योजना बना रहे हैं।

डा तरुशिखा सर्वेश और शीराज अहमद, जो कार्यशाला के संबंधित समन्वयक और प्रशिक्षक थे, ने कहा कि “कार्यशाला में, प्रतिभागियों को लैंगिक सामाजिक निर्माण और लैंगिक भूमिकाओं सहित लैंगिक संवेदीकरण के विभिन्न पहलुओं के सम्बन्ध में जागरूक किया गया तथा उन्हें लैंगिक भेदभाव, रूढ़ियों, पूर्वाग्रहों और लैंगिक समानता सहित लिंग से संबंधित मुद्दों से अवगत कराया गया।

उन्होंने कहा कि छात्र अपने स्वयं के पूर्वाग्रहों का सामना करते हैं, जो उन्हें अपने स्वयं के सीखने के पैटर्न पर सवाल उठाने के लिए मजबूर करते हैं। कार्यशाला में चर्चा के माध्यम से विश्वास निर्माण की आवश्यकता की पहचान की गई और विश्वविद्यालय परिसरों और समाज में एक सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण स्थापित करने के लिए सुरक्षा के विचारों पर ज़ोर दिया गया।

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