अलीगढ़, 13 अक्टूबर 2026। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के वीमेंस कॉलेज में मंगलवार को रचनात्मक लेखन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में लेखन-कौशल, रचनात्मकता और साहित्यिक अभिरुचि को प्रोत्साहित करना था। कार्यशाला में प्रख्यात साहित्यकारों, शिक्षाविदों और लेखकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए छात्राओं को कहानी-लेखन, कविता-सृजन और साहित्यिक अभिव्यक्ति की बारीकियों से परिचित कराया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कुरान के पाठ से हुआ। वीमेंस कॉलेज की प्रधानाचार्या प्रोफेसर शगुफ्ता इम्तियाज ने अतिथि ज़हरा नक़वी और डॉ. मोइद रशीदी का स्वागत एवं सम्मान किया। इस अवसर पर अतिथियों के साहित्यिक योगदान पर भी प्रकाश डाला गया। डॉ. मोइद रशीदी ने उर्दू कविता और साहित्यिक आलोचना के क्षेत्र में अपने महत्त्वपूर्ण योगदान से पहचान बनाई है, जबकि ज़हरा नक़वी साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
प्रोफेसर नाज़िया हसन ने क्रिएटिव राइटर्स फ़ोरम के उद्देश्य और उसकी भूमिका पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य लेखकों और विचारकों को एक सुरक्षित एवं समावेशी वातावरण प्रदान करना है, जहाँ वे स्वतंत्र रूप से अपने विचार और रचनाएँ प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने फ़ोरम की स्थापना और विकास में योगदान देने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. नाज़िश बेगम की पुस्तक ‘कथ्य-विन्यास से शिल्प-सौंदर्य तक: ’कहानी प्रवाह‘ का समीक्षात्मक पाठ का विमोचन भी किया गया। पुस्तक को हिंदी साहित्यिक आलोचना के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान के रूप में प्रस्तुत किया गया।
मुख्य अतिथि ज़हरा नक़वी ने अपने साहित्यिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए छात्राओं को लेखन के प्रति प्रेरित किया। डॉ. मोइद रशीदी ने भी विद्यार्थियों को रचनात्मक लेखन के लिए कल्पनाशीलता, व्यक्तित्व-विकास और निरंतर अभ्यास के महत्त्व से परिचित कराया। उन्होंने साहित्य-सृजन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को लेकर भी अपने विचार रखे।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में कहानी-कला, कहानी की संरचना, प्रभावी लेखन-शैली और रचनाओं के प्रकाशन से संबंधित व्यावहारिक सुझाव दिए गए। दूसरे सत्र में साहित्यिक अनुभवों और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में छात्राओं ने काव्य-पाठ भी किया। नरगिस खातून, मंतशा, हलीमा और युसरा ने अपनी प्रस्तुतियों से सहभागिता दर्ज कराई। अंत में हुमैरा आफरीदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह का समापन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के तराने और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस आयोजन ने छात्राओं को साहित्यिक अभिव्यक्ति के नए अवसर प्रदान करने के साथ-साथ रचनात्मक लेखन के प्रति उनकी रुचि को प्रोत्साहित किया।






