एएमयू की पूर्व छात्रा डॉक्टर हशिमा ने दुनिया में फहराया परचम, नासा टेलीस्कोप के लॉन्च में अहम भूमिका

अमुवि की पुरातन छात्रा डा हाशिम ने 1968 से 1973 के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में परमाणु भौतिकी में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है

एएमयू की पूर्व छात्रा डॉक्टर हशिमा।

अलीगढ़, 29 दिसंबरः किसी भी संस्थान के लिए यह गौरव की बात होती है कि उसके पुरातन छात्र अपने करियर में शिखर तक पहुंचें या संबंधित क्षेत्र में एक सेलिब्रिटी का दर्जा प्राप्त करलें। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को इस क्रिसमस ऐसी ही एक रोमांचक उपलब्धि प्राप्त हुई जब नासा ने क्रिसमस दिवस पर जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप को लांच किया जिससे जुड़े वैज्ञानिकों की टीम में अमेरिका में अमुवि की पूर्व छात्रा डा. हाशिमा हसन भी शामिल हैं।

एएमयू की पूर्व छात्रा डॉक्टर हशिमा।


लखनऊ में जन्मी डा हाशिमा हसन, जिन्होंने 1968 से 1973 के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में परमाणु भौतिकी में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की, ने नासा के हालिया अंतरिक्ष मिशन, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के 25 दिसंबर के प्रक्षेपण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की उप कार्यक्रम वैज्ञानिक डा हसन, उस टीम का हिस्सा थी, जिसकी देख रेख में फ्रेंच गुयाना के यूरोपीय स्पेसपोर्ट कौरौ से दुनिया के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप को लान्च किया गया था। चार उपकरणों से लैस जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप, लैग्रेंज पाइंट 2 नामक स्थान पर स्थित होगा, जो पृथ्वी से 1.5 मीटर किमी या चंद्रमा से चार गुना से अधिक दूर है। इसका मिशन काल पांच से 15 वर्ष तक है।
डा. हसन ने अमुवि से स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने के उपरान्त आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में परमाणु भौतिकी में उच्च अध्ययन के लिए एक प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति प्राप्त की। उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई से पोस्टडाक्टोरल डिग्री प्राप्त कर संयुक्त राज्य अमेरिका जाने से पूर्व मुंबई में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में भी कार्य किया।
डा हसन एक दर्जन से अधिक मिशनों में शामिल रही हैं और उनका कार्य यह सुनिश्चित करना था कि नासा के रणनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप इसकी प्रत्येक परियोजना सफल होे। वह एस्ट्रोफिजिक्स के लिए एजुकेशन एंड कम्युनिकेशन लीड के अतिरिक्त एस्ट्रोफिजिक्स एडवाइजरी कमेटी के कार्यकारी सचिव के रूप में भी काम कर रही हैं।
डा. हसन ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में उन्होंने जो समय बिताया, वही भविष्य की उनकी सफलताओं की बुनियाद है।

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